विकास योजनाएँ

दीर्घकालीन कार्य योजनाएँ -
पर्याप्त अवसंरचनात्मक सुविधाएँ तथा प्रतियोगी टैरिफ देना ही पोर्ट की दीर्घकालीन योजना है ।
अतिरिक्त अवसंरचना
14 मीटर तक डुबाव वाले जलयानों के प्रहस्तन के लिए सरणी को गहरा करना |
20/25 टन क्षमतायुक्त दो ई एल एल क्रेनों का संस्थापन ।
वाड़ीनार में गहरे डुबाव वाले बहु उद्देश्यीय घाट ।
नौभार घाट को प्रारंभ करना ।
वाहित्र तंत्र सहित तीसरा वाणिज्य प्रहस्तन संयंत्र चालू करना ।
विविध पोर्ट सेवाओं का निजीकरण ।
ई-ग्राहक सम्पर्क प्रबंधन ।
गारंटी देनेवाले विभिन्न निर्यातकों / आयातकों के साथ दीर्घकालीन संविदा करना, पोर्ट द्वारायातायात की आवश्यक अवसंरचनात्मक तथा प्रहस्तन सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा ऐसी दीर्घकालीन संविदाओं के लिए अलग से टैरिफ नियत करना ।
यातायात को बढावा देने के लिए बीओटी के आधार पर विभिन्न निर्यातकों / आयातकों को विद्यमान अवसंरचनात्मक सुविधाएँ उपलब्ध कराना ।

अल्पकालीन कार्य योजनाएँ :
वर्तमान परिदृश्य में कंडला पोर्ट ट्रस्ट की अल्पकालीन योजना में वर्तमान नौभार तथा ग्राहकों को बनाए रखना शामिल है । वर्तमान नौभार की बढती रफतार तथा ग्राहकों की सुव्यवस्थित वृद्धि का पोर्ट के विकास में अद्वितीय योगदान होगा । अत:कंडला पोर्ट ट्रस्ट द्वारा अल्पकालीन संबंध अंगीकृत किया गया है ।
न्यूनतम मूल्य नीति ।
पोर्ट की क्षमता के अनुसार ही नौभार रखना ।
अपनी कमियों को दूर करने तथा जोखिमों का सामना करने हेतु प्रयास करना ।
सानुकूल विपणन नीति अपनाना ।
विद्यमान अवसंरचनात्मक पोर्ट सुविधाएँ बढ़ाना ।
थोक नौभार के भंडारण हेतु सीमाशुल्क भवन से घिरे हुए क्षेत्र को 76.5 हेक्टेयर तक बढ़ाने से संबंधित कार्य पहले से ही क्रियान्वयन के अधीन है और इस परियोजना पर होने वाला कुल व्यय 15 करोड़ रुपये है । इस योजना के प्रारंभ होने से 10 लाख टन भंडारण की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी और इस योजना के वर्ष 2002 तक पूर्ण हो जाने की संभावना है ।
रु. 10 करोड़ की प्राक्कलित लागत पर इस क्षेत्र में रेल पाश्दिवका सुविधा मुहैया करवाने की भी योजना है ।
12 मीटर डुबाव तक के जलयानों को संभालने के लिए निकर्षण कार्य करने की योजना है जिससे थोक नौभार का पार्सल आकार बढ़ेगा तथा बड़े कंटेनर जलयानों की संख्या बढ़ेगी ।
वाड़ीनार में यू एल सी सी को संभालने के लिए रु. 20 करोड़ की लागत पर एक 50 टन बौलार्ड पुल कर्ष नौका की अधिप्राप्ति की जा रही है ।
बन्दर बेसिन में 40,000 वर्ग मीटर माप के खुले भंडारण क्षेत्र सहित 210 मीटर बजरा प्रहस्तन सुविधा भित्ति के सामने तैयार की जा रही है ताक 88,000 टन का अतिरिक्त नौभार रखा जा सके । इस योजना की प्राक्कलित लागत रु. 18.97 करोड़ है और इसके मार्च 2003 तक पूर्ण हो जाने की संभावना है ।
अंतर्प्रदेश से 130 किलो मीटर की दूरी कम करने के लिए सामाख्याली- पालनपुर रेल पटरियों को ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने का कार्य रु. 342.96 करोड़ की लागत से एस पी वी द्वारा निष्पादित किया जाना है । परियोजना के प्राक्कलित लागत पर प्रोत्साहकों द्वारा दी जाने वाली 50% की राशि में से 30 % अर्थात् रु. 51.44 करोड की राशि साधारण शेयरधारिता के रुप में कंडला पोर्ट एस पी वी को देगा ।
रु. 2.00 करोड़ की लागत पर रेलवे तंत्र का आधुनिकीकरण तथा विस्तरण ताकि पोर्ट से नौभार का शीघ्रता से संचलन हो सके ।
रु. 6.00 करोड़ की लागत से चार नये गोदाम बनाये जा रहे है जिससे 85,000 मी0 टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता प्राप्त हो सकेगी । इन नये गोदामों का कार्य मार्च, 2002 तक पूर्ण हो जाने की संभावना है ।
11वें नौभार घाट के लिए रु. 36 करोड़ की निविदायें प्राप्त हुई हैं । पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा निर्बाधन प्राप्त हो जाने का बाद सबसे न्यूनतम निविदाकर्ता मैसर्स एन ई सी लिमिटेड , विशाखापट्टणम को कार्यादेश दिया जायेगा ।
16 मी0 टन तथा 25 मी0 टन क्षमतायुक्त पाँच ईएलएल क्रेनों की अधिप्राप्ति से संबंधित योजना रु.70 करोड़ की प्राक्कलित लागत पर क्रियान्वित की जा रही है जिसे अक्तूबर, 2004 से अक्तूबर2005 तक संस्थापित करते हुए प्रारंभ किया जाना है ।

मध्यावधि कार्य योजनाएँ :
थोक ,ब्रेक बल्क , कंटेनर तथा तरल नौभार के प्रहस्तन हेतु अवसंरचनात्मक सुविधाएँ बढ़ाना ।
12वें नौभार घाट को प्रारंभ करना ।
13 मीटर डुबाव वाले जलयानों को संभालने के लिए सरणी की गहराई बढाना ।
4300 मी0 टन क्षमतायुक्त दो नये गोदाम शुरु करना ।
 
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